पहली बार अखिलेश यादव ने परिवारजनों को टिकट के लिए की ना,

नीरज शर्मा
ब्यूरो रिपोर्ट

लखनऊ । सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे में अपनों को ना कह दिया है। सपा प्रमुख ने टिकट बंटवारे में अपने परिवार को तरजीह नहीं दी है। परिवार के जो सदस्य लोकसभा चुनाव हारे उन्हें इस बाबत ना कह दिया गया है। बस शिवपाल यादव के साथ गठबंधन होने के नाते ही उन्हें टिकट मिल पाया है। पर शिवपाल अपने बेटे को भी टिकट नहीं दिला पाए। समाजवादी पार्टी के संरक्षण मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव के भाई अनुराग यादव पिछली बार लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से चुनाव लड़े थे पर वो जीतने में नाकाम रहे थे। इस बार उन्हें भी कहीं से टिकट नहीं दिया गया। बताया यह भी जाता है कि अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव और रामगोपाल यादव की सहमति से यह फैसला किया कि परिवार की बहुओं को इस बार विधानसभा चुनाव में नहीं उतारा जाएगा। 2017 के चुनाव में मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को लखनऊ कैंट की सीट से उतारा गया था लेकिन उन्हें भाजपा के रीता बहुगुणा जोशी से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार वह सपा का दामन छोड़ कमल का हाथ थाम चुकी हैं। रिश्ते में मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम यादव सपा के टिकट पर पिछली बार सिरसागंज से जीते थे। बाद में वह शिवपाल के साथ चले गए थे। ऐसे में इस बार भी उनका टिकट कटना तय माना जा रहा था। हरिओम भी भाजपा से प्रत्याशी हो गए। अखिलेश यादव के चचेरे भाई अंशुल यादव की भी विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा अधूरी रह गई। वह जिला पंचायत सदस्य हैं। मुलायम सिंह के बड़े भाई रतन सिंह के पौत्र तेज प्रताप यादव की भी विधायक बनने की तमन्ना थी। मुलायम के भाई राजपाल के बेटे अंशुल को भी इसी वजह से चुनावी समर से दूर रखा गया। मुलायम परिवार की नई पीढ़ी के सदस्य धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, तेज प्रताप यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को पिछली बार लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। शुरू में यह कहा जा रहा था कि पार्टी इन्हें विधानसभा चुनाव लड़ा सकती है। लेकिन परिवार ने इन्हें इस बार चुनावी मैदान से दूर रखने का निर्णय लिया और इनसे कहा गया कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार करें। मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव ने सपा से अलग होकर प्रसपा बनाई। चुनाव के उनकी पार्टी और वह सपा के साथ आ गए।अखिलेश यादव ने त्याग की अपील करते हुए  प्रसपा की 30 सीटों की मांग नकार दी। यहां तक चचेरे भाई आदित्य यादव को चुनाव नहीं लड़ाया गया। असल में शिवपाल खुद गुन्नौर से और बेटे आदित्य को जसवंत नगर की सीट से लड़ाना चाहते थे। सपा ने शिवपाल यादव को टिकट दिया। अगर सपा उन्हें टिकट न देती तो वह अपनी पार्टी के 100 उम्मीदवार उतारकर चुनावी मैदान में उतर जाते। इससे सपा को कहीं ना कहीं नुकसान उठाना पड़ता। आपको यह भी बता दें कि इस बार परिवार से केवल अखिलेश व शिवपाल यादव भी चुनावी मैदान में हैं।

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