94 बार चुनाव हारने वाले हसनुराम अंबेडकरी फिर मैदान में, 100 बार हारने का रिकॉर्ड बनाएंगे

94 बार चुनाव हारने वाले हसनुराम अंबेडकरी फिर मैदान में, 100 बार हारने का बनाएंगे रिकॉर्डआगरा। 94वां नामांकन दाखिल करने के बाद हसनुराम ने दावा किया कि जब तक वह जीवित हैं, चुनाव लड़ते रहेंगे। उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि वह चुनाव हारने के लिए ही लड़ते हैं। हसनुराम अब तक ग्राम पंचायत से लेकर सांसद, विधायक, एमएलसी तक का चुनाव लड़ चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में चुनावी पारा चढ़ा हुआ है। पहले चरण के मतदान के लिए उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हर उम्मीदवार चुनाव में अपने-अपने जीत के दावे करता है। चुनावी जीत के लिए वह दमखम भी लगाता है। इन सबके बीच आगरा के एक ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार ने भी नामांकन भरा है जो अब तक 94 नामांकन दाखिल कर चुका है। जी हां, हम बात कर रहे हैं 74 साल के हसनुराम अंबेडकरी की। आगरा जिले की खैरागढ़ विधानसभा सीट से हसनुराम ने अपना नामांकन भरा है। हसनुराम अब तक 94 बार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं लेकिन सफलता उन्हें नहीं मिली है।

94वां नामांकन दाखिल करने के बाद हसनुराम ने दावा किया कि जब तक वह जीवित हैं, चुनाव लड़ते रहेंगे। उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि वह चुनाव हारने के लिए ही लड़ते हैं। हसनुराम अब तक ग्राम पंचायत से लेकर सांसद, विधायक, एमएलसी तक का चुनाव लड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, हसनुराम ने तो 1988 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी आवेदन किया था। लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया था। हसनुराम ग्राम आगरा की खेरागढ़ तहसील के नगला रामनगर दूल्हे खां के रहने वाले हैं। बहुजन समाज पार्टी के अस्तित्व में आने से पहले हसनुराम अंबेडकर कांशीराम द्वारा स्थापित अखिल भारतीय पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी संघ के सदस्य थे। हसनुराम ने तो यह भी कह दिया है कि मैं 100 बार चुनाव हारने का रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि मेरा विरोधी कौन है। मैं अंबेडकर की विचारधारा में विश्वास करता हूं और मतदाताओं के एक विकल्प के लिए मैं चुनाव लड़ता हूं। जीतने वाले नेता तो जनता को भूल जाते हैं। हसनुराम अंबेडकरी 2021 के जिला परिषद चुनाव में भी उतरे थे लेकिन हार का सामना करना पड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आगरा और फतेहपुर सिकरी सीटों से अपना नामांकन दाखिल किया था लेकिन जमानत नहीं बचा पाए थे। 1989 के लोकसभा चुनाव में हसनुराम को 36000 वोट हासिल हुए थे।

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